JDS फंड में बड़ा खेल? बिना मांग, बिना बैठक कागजों में खरीदी दिखाकर लाखों के भुगतान का आरोप
9 PHC के JDS खातों से 30–40 लाख रुपये के भुगतान का मामला, जांच में अनियमितताएं और जिम्मेदारी तय होने की बात सामने आई
बिल्हा/बिलासपुर। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बिल्हा सहित क्षेत्र के 9 PHC में JDS (जन स्वास्थ्य समिति) के वित्तीय प्रबंधन को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप है कि कई मामलों में बिना मांग-पत्र, बिना सक्षम बैठक और बिना अनुमोदन के कागजों में सामग्री खरीदी दर्शाकर JDS खातों से करीब 30 से 40 लाख रुपये के भुगतान किए गए। मामले की जांच में वित्तीय अनियमितताएं सामने आने तथा जिम्मेदार लोगों को दोषी पाए जाने की बात कही जा रही है।
बिना बैठक और मांग के कागजों में खरीदी!
आरोप है कि JDS के माध्यम से होने वाली खरीदी प्रक्रिया में निर्धारित नियमों और समिति की बैठकों को दरकिनार किया गया। जिन सामग्रियों की वास्तविक मांग या खरीदी का स्पष्ट रिकॉर्ड होना चाहिए, उनमें कथित तौर पर दस्तावेजों में खरीदी दर्शाकर भुगतान किया गया। इससे JDS फंड को आर्थिक क्षति पहुंचने का आरोप है।
रिश्तेदारों समेत 15–20 लोगों को कामगार दिखाकर भुगतान का आरोप
CHC बिल्हा की JDS साधारण सभा एवं कार्यकारिणी सभा के अनुमोदन को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए जा रहे हैं। आरोप है कि बिना विधिवत अनुमोदन के करीब 15 से 20 लोगों को विभिन्न कार्यों में कामगार दर्शाया गया और उनके नाम पर प्रतिमाह लगभग 1.50 लाख रुपये का भुगतान किए जाने की बात सामने आई है।
आरोपों में यह भी कहा जा रहा है कि भुगतान पाने वालों में संबंधित अधिकारियों/कर्मचारियों के रिश्तेदारों को भी कामगार के रूप में दर्शाया गया। यदि यह तथ्य दस्तावेजों से प्रमाणित होता है, तो यह JDS निधि के उपयोग और नियुक्ति/भुगतान प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
“दूधारू गाय” की तरह JDS फंड के इस्तेमाल का आरोप
स्थानीय स्तर पर आरोप लगाया जा रहा है कि BPM और BMO के स्तर पर JDS कोष का मनमाने तरीके से इस्तेमाल किया गया, जिसके कारण शासन की स्वास्थ्य योजनाओं के लिए उपलब्ध निधि पर आर्थिक भार पड़ा। अब सवाल यह है कि जिन भुगतानों और खरीदी को कागजों में दर्शाया गया, उनका वास्तविक लाभ मरीजों और स्वास्थ्य संस्थाओं को कितना मिला?
मैदानी कर्मचारी से वर्षों से वित्तीय प्रबंधन का काम!
मामले का एक और महत्वपूर्ण पहलू यह है कि एक सुपरवाइजर, जिसका मूल कार्य मैदानी स्तर पर सेवाएं देना है, उससे कथित तौर पर विगत वर्षों से JDS के वित्तीय प्रबंधन का काम लिया जा रहा है। सवाल उठता है कि वित्तीय कार्य के लिए निर्धारित व्यवस्था होने के बावजूद मैदानी कर्मचारी को लंबे समय से JDS के वित्तीय प्रबंधन की जिम्मेदारी किस आदेश के तहत दी गई?
जांच में दोषी पाए जाने की बात, अब कार्रवाई का इंतजार
मामले की जांच में वित्तीय अनियमितताओं के सामने आने और संबंधित लोगों के दोषी पाए जाने की बात कही जा रही है। ऐसे में अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि जांच में अनियमितता और जिम्मेदारी तय हो चुकी है तो संबंधित अधिकारियों-कर्मचारियों पर अब तक क्या कार्रवाई की गई?
JDS की राशि मरीजों और स्वास्थ्य सेवाओं के हित में खर्च की जानी है। ऐसे में बिना मांग, बिना बैठक, बिना अनुमोदन और संदिग्ध भुगतान के आरोपों की निष्पक्ष उच्चस्तरीय जांच, संबंधित दस्तावेजों का ऑडिट तथा दोषियों से राशि की वसूली की मांग उठ रही है।
अब निगाहें इस बात पर हैं कि जांच रिपोर्ट के आधार पर विभाग कब तक जिम्मेदारों पर कार्रवाई करता है और JDS खाते से हुए कथित भुगतानों की वास्तविकता सार्वजनिक होती है।

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