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कोटा की जीवनदीप समितियों में 1.45 करोड़ की वित्तीय अनियमितता!

 कोटा की जीवनदीप समितियों में 1.45 करोड़ की वित्तीय अनियमितता!


₹12.26 लाख की वसूली के निर्देश, फिर भी वर्षों से राशि जमा कराने पर सवाल


ऑडिट रिपोर्ट के बाद भी कार्रवाई अधूरी? CMHO बिलासपुर की भूमिका पर उठे गंभीर सवाल


बिलासपुर। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कोटा के अंतर्गत संचालित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की जीवनदीप समितियों में वित्तीय अनियमितताओं का मामला एक बार फिर चर्चा में है। उपसंचालक, स्थानीय निधि संपरीक्षा, बिलासपुर द्वारा वर्ष 2020 में की गई संपरीक्षा के अनुसार, विभिन्न जीवनदीप समितियों में ₹1,45,50,180 की अनियमितता एवं अनधिकृत व्यय सामने आने का उल्लेख है। इनमें से ₹12,26,456 की वसूली कर जीवनदीप समिति के खाते में जमा कराने के निर्देश दिए गए थे। लेकिन वर्षों बाद भी वसूली और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई को लेकर सवाल उठ रहे हैं।


2021 में जारी हुए निर्देश, फिर भी वसूली का इंतजार!


प्राप्त विवरण के अनुसार, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO), बिलासपुर ने 9 मार्च 2021 को पत्र जारी कर कोटा विकासखंड की संबंधित जीवनदीप समितियों के सचिवों से राशि वसूली के निर्देश दिए थे। इसके बाद तत्कालीन खंड चिकित्सा अधिकारी डॉ. निखिलेश गुप्ता द्वारा 2 जून 2021, 29 जुलाई 2021 और 11 दिसंबर 2021 को संबंधित सचिवों को पत्र जारी किए जाने का उल्लेख है।


इसके बावजूद यदि निर्धारित राशि की वसूली नहीं हुई और जीवनदीप समिति के खातों में रकम जमा नहीं कराई गई, तो यह प्रशासनिक जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े करता है। सवाल यह भी है कि बार-बार पत्र जारी होने के बाद वसूली की वास्तविक स्थिति की समीक्षा किस स्तर पर हुई और जिम्मेदारी तय करने के लिए क्या कदम उठाए गए?


10 स्वास्थ्य संस्थान जांच के दायरे में


यह मामला सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कोटा के अंतर्गत प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र रतनपुर, केंदा, आमागोहन, करगी कला, शिवतराई, टेगन माडा चपोरा, नवागांव, बेलगहना और पोड़ी में संचालित जीवनदीप समितियों से संबंधित बताया गया है।


जीवनदीप समिति का उद्देश्य स्वास्थ्य संस्थानों की सेवाओं और व्यवस्थाओं को बेहतर बनाना है। ऐसे में यदि ऑडिट में अनियमित या अनधिकृत व्यय प्रमाणित हुआ है, तो संबंधित अभिलेखों की जांच, जिम्मेदार व्यक्तियों का निर्धारण और नियमानुसार वसूली आवश्यक है।


CMHO की भूमिका पर सवाल—वसूली क्यों नहीं हुई?


वर्ष 2022 से पदस्थ CMHO बिलासपुर के कार्यकाल में भी यदि ऑडिट में दर्शाई गई राशि की वसूली नहीं हुई, तो यह जानना जरूरी है कि इस मामले में अब तक क्या कार्रवाई की गई। क्या संबंधित अधिकारियों से जवाब मांगा गया? क्या वसूली की समय-सीमा तय की गई? क्या दोषी पाए गए व्यक्तियों के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई की अनुशंसा की गई?


इन सवालों का जवाब संबंधित विभाग के दस्तावेजों और आधिकारिक पक्ष से ही स्पष्ट हो सकेगा।



डॉ. निखिलेश गुप्ता के विरुद्ध कार्रवाई की अनुशंसा क्यों नहीं?


शिकायत में आरोप लगाया गया है कि तत्कालीन BMO डॉ. निखिलेश गुप्ता के स्तर पर राशि की वसूली सुनिश्चित नहीं की गई। शिकायतकर्ता का सवाल है कि यदि निर्धारित जिम्मेदारियों का पालन नहीं हुआ और समिति को आर्थिक नुकसान पहुंचा, तो संबंधित अधिकारी के विरुद्ध उच्च अधिकारियों को कार्रवाई की अनुशंसा भेजने में देरी क्यों हुई?



वहीं, जिला कार्यालय में स्टोर प्रभारी की जिम्मेदारी और बड़ी खरीदारियों में संबंधित अधिकारी की भूमिका को लेकर भी पारदर्शिता की मांग उठाई जा रही है। हालांकि, इन खरीदारियों में किसी अन्य अनियमितता का आरोप अभी स्वतंत्र दस्तावेजी जांच के बिना प्रमाणित नहीं माना जा सकता।


सबसे बड़ा सवाल: वसूली का आदेश कागजों तक सीमित तो नहीं?


यदि ऑडिट रिपोर्ट में वित्तीय अनियमितता दर्ज है और वसूली के निर्देश भी जारी किए जा चुके हैं, तो वर्षों तक राशि जमा नहीं होना प्रशासनिक निगरानी की प्रभावशीलता पर सवाल उठाता है। विभाग को स्पष्ट करना चाहिए कि कुल कितनी राशि वास्तव में वसूल हुई, कितनी शेष है और जिम्मेदारी तय करने के लिए क्या कार्रवाई की गई।



अब निगाहें CMHO कार्यालय पर हैं—क्या जीवनदीप समितियों की राशि की वसूली कराई जाएगी और जिम्मेदार पाए जाने वालों पर नियमानुसार कार्रवाई होगी, या मामला पत्राचार तक ही सीमित रहेगा?


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