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*🚨 बिल्हा जनपद में ‘बिना हस्ताक्षर’ वेतन का खेल! जांच टीम के नाम पर लीपापोती का आरोप, सचिव को बचाने में जुटे अधिकारी?*

 

*🚨 बिल्हा जनपद में ‘बिना हस्ताक्षर’ वेतन का खेल! जांच टीम के नाम पर लीपापोती का आरोप, सचिव को बचाने में जुटे अधिकारी?*



बिल्हा। जनपद पंचायत बिल्हा में अटैचमेंट पर पदस्थ एक पंचायत सचिव की उपस्थिति पंजी में लंबे समय से हस्ताक्षर नहीं होने के बावजूद हर महीने वेतन भुगतान किए जाने का मामला अब गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। आरोप है कि उपस्थिति पंजी में हस्ताक्षर नहीं होने के बावजूद जनपद पंचायत के संबंधित बाबू द्वारा वेतन बिल तैयार किए जा रहे हैं और अधिकारियों की स्वीकृति से भुगतान भी किया जा रहा है।

मामला सामने आने के बाद शिकायतकर्ता द्वारा जनपद पंचायत के अधिकारियों से इसकी जानकारी मांगी गई। अधिकारियों की ओर से बताया गया कि मामले की जांच के लिए टीम गठित कर दी गई है और जांच पूरी होने के बाद शिकायतकर्ता को अवगत कराया जाएगा। लेकिन आरोप है कि आज दिनांक तक न तो जांच टीम गठित होने की कोई स्पष्ट जानकारी सामने आई, न जांच शुरू हुई और न ही शिकायतकर्ता को जांच की प्रगति से अवगत कराया गया।

🔴 जांच टीम बनी या सिर्फ कागजों में?

शिकायतकर्ता का आरोप है कि जनपद पंचायत में भ्रष्टाचार और अनियमितता से जुड़े मामलों में कार्रवाई के बजाय जांच के नाम पर केवल लीपापोती की जा रही है। यदि वास्तव में जांच टीम गठित की गई है तो उसके सदस्यों के नाम, जांच आदेश और जांच की वर्तमान स्थिति सार्वजनिक क्यों नहीं की जा रही?

🔥 बिना हस्ताक्षर वेतन भुगतान पर सबसे बड़ा सवाल

उपस्थिति पंजी किसी भी कर्मचारी की कार्यालयीन उपस्थिति का महत्वपूर्ण रिकॉर्ड माना जाता है। ऐसे में यदि संबंधित अटैच सचिव की उपस्थिति पंजी में लंबे समय से हस्ताक्षर नहीं हैं, तो यह जांच का विषय है कि वेतन बिल किस आधार पर तैयार हुआ, किसने सत्यापित किया और किस अधिकारी ने भुगतान की अनुमति दी?

❓ क्या अधिकारी दे रहे हैं संरक्षण?

मामले में अब सवाल सीधे जनपद पंचायत के जिम्मेदार अधिकारियों पर उठ रहे हैं—

क्या एक कथित अनियमितता के मामले में जिम्मेदार अधिकारी जानबूझकर कार्रवाई से बच रहे हैं?

क्या जांच टीम गठित करने की बात केवल शिकायतकर्ता को शांत करने के लिए कही गई थी?

क्या जनपद पंचायत CEO की जानकारी में बिना उपस्थिति हस्ताक्षर के वेतन भुगतान हुआ?

और सबसे बड़ा सवाल—

🚨 अगर सब कुछ नियमों के मुताबिक है तो जांच से इतनी दूरी क्यों?

मामले की निष्पक्ष जांच के लिए संबंधित सचिव की उपस्थिति पंजी, वेतन बिल, वेतन भुगतान रिकॉर्ड, अटैचमेंट आदेश, कार्य आवंटन, उपस्थिति सत्यापन तथा जांच टीम गठन संबंधी आदेश की जांच आवश्यक है।

शिकायतकर्ता का कहना है कि यदि आरोप निराधार हैं तो दस्तावेजों के आधार पर स्थिति स्पष्ट की जाए और यदि अनियमितता हुई है तो जिम्मेदार अधिकारियों-कर्मचारियों की भूमिका तय कर नियमानुसार कार्रवाई की जाए।

अब निगाहें जनपद पंचायत बिल्हा के जिम्मेदार अधिकारियों पर हैं—क्या वे निष्पक्ष जांच कर सच्चाई सामने लाएंगे या फिर ‘जांच टीम गठित है’ कहकर मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा?

नोट: वेतन भुगतान और संरक्षण से जुड़े आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि संबंधित दस्तावेजों एवं आधिकारिक जांच के बाद ही होगी। संबंधित अधिकारियों/कर्मचारियों का पक्ष सामने आने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाना चाहिए।

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