ऑपरेशन एम्बुलेंस: बिलासपुर जिले में परिवहन विभाग से बिना पंजीयन के 2022 से फॉर्स कंपनी की 4 एम्बुलेंस दौड़ रही सड़कों पर
SECL के CSR फंड से मिली 4 एम्बुलेंस पर गंभीर सवाल, लाखों के डीजल भुगतान की जांच की मांग
बिल्हा/तखतपुर/कोटा /मस्तूरी ब्लॉक के लिए SECL के CSR मद से खंड चिकित्सा अधिकारियों को उपलब्ध कराई गई एम्बुलेंस अब गंभीर विवादों में घिरती दिखाई दे रही है। आरोप है कि एम्बुलेंस का परिवहन विभाग में आज तक पंजीयन (Registration) नहीं कराया गया, इसके बावजूद वर्षों तक इसका संचालन और डीजल व्यय दर्शाया जा रहा है। SECL स्वास्थ्य एवं सामुदायिक परियोजनाओं के लिए CSR फंड उपलब्ध कराता है।
प्रमाणित दस्तावेजों के आधार पर लगाए जा रहे आरोपों के अनुसार अप्रैल 2022 से सितंबर 2024 तक की बिल्हा को प्रदाय एम्बुलेंस के लॉगबुक में एक भी मरीज के परिवहन का रिकॉर्ड नहीं है, लेकिन इसी अवधि में एम्बुलेंस 20,015 किलोमीटर चलने का उल्लेख है। वहीं डीजल पर ₹2,48,000 से अधिक का भुगतान दर्शाया गया है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि एम्बुलेंस ने किसी मरीज को अस्पताल तक नहीं पहुंचाया, तो 20 हजार किलोमीटर का सफर किस उद्देश्य से तय किया गया?
जांच के दायरे में चालक रमेश कौशिक, नरेंद्र वर्मा, विनोद और सोहन के नाम भी चर्चा में बताए जा रहे हैं।
दस्तावेजों में यह भी आरोप है कि 50 .5 लीटर क्षमता लगभग वाले डीजल कैन में 64.5 लीटर तक डीजल भरने और एक ही बार में 66.5 लीटर डीजल जारी किए जाने जैसी प्रविष्टियां दर्ज हैं, जिससे रिकॉर्ड की विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्न खड़े हो रहे हैं।
अब मांग उठ रही है कि पूरे मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराई जाए तथा यदि दस्तावेजों में दर्ज आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों एवं कर्मचारियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए।
: तखतपुर, कोटा, बिल्हा और मस्तूरी में बिना पंजीयन दौड़ रहीं एम्बुलेंस! हादसा हुआ तो जिम्मेदार कौन?
स्वास्थ्य सेवाओं में गंभीर लापरवाही का मामला सामने आया है। आरोप है कि तखतपुर, कोटा, बिल्हा और मस्तूरी क्षेत्र में एम्बुलेंस बिना विधिवत परिवहन विभाग में पंजीयन के संचालित की जा रही हैं। यदि ऐसी किसी एम्बुलेंस से दुर्घटना होती है या मरीज की जान चली जाती है, तो इसकी जिम्मेदारी किसकी होगी—संचालन करने वाले विभाग की, संबंधित अधिकारी की या वाहन के प्रभारी की? यह बड़ा सवाल खड़ा हो गया है।
मोटर वाहन कानून के तहत सामान्यतः सार्वजनिक सड़क पर वाहन का वैध पंजीयन आवश्यक होता है। यदि वास्तव में कोई सरकारी एम्बुलेंस बिना वैध पंजीयन के चलाई जा रही है, तो इसकी जांच और जिम्मेदारी तय किया जाना आवश्यक है।
सवाल जो जवाब मांगते हैं:
* क्या बिना पंजीयन एम्बुलेंस का संचालन नियमों के अनुरूप है?
* यदि दुर्घटना होती है तो जवाबदेह कौन होगा?
* क्या संबंधित अधिकारियों ने इस मामले की जांच कराई है?
* क्या परिवहन विभाग और स्वास्थ्य विभाग कार्रवाई करेंगे?

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