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*एक वर्षीय संविदा (NHM) में नियुक्त चार चिकित्सक जिन्हें अधिकार नहीं महत्वपूर्ण स्वास्थ्य योजनाओं का कर रहे मटियामेट cmho की भूमिका संदिग्ध*

 

*एक वर्षीय संविदा (NHM) में नियुक्त चार चिकित्सक जिन्हें अधिकार नहीं महत्वपूर्ण स्वास्थ्य योजनाओं का कर रहे मटियामेट cmho की भूमिका संदिग्ध*

बिलासपुर। स्वास्थ्य विभाग में प्रशासनिक अधिकारों के इस्तेमाल को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप है कि संविदा चिकित्सक डॉ. ए.आर. बंजारे द्वारा पिछले करीब सात महीनों में शासन के निर्धारित नियमों और अधिकार क्षेत्र की कथित अनदेखी करते हुए खंड चिकित्सा अधिकारी (BMO) के पद की सील-मुहर और हस्ताक्षर का इस्तेमाल किया गया। आरोप यह भी है कि इसी माध्यम से चिकित्सकों एवं कर्मचारियों की ड्यूटी लगाने सहित करीब 15–20 आदेश प्रसारित किए गए।

मामला केवल आदेश जारी करने तक सीमित नहीं बताया जा रहा है। आरोपों के अनुसार, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. शुभा गरेवाल द्वारा ऐसे हस्ताक्षरों एवं आदेशों को मान्यता दिए जाने से प्रशासनिक व्यवस्था और अधिकारों की वैधता पर भी सवाल उठ रहे हैं। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह मामला केवल विभागीय अनियमितता नहीं, बल्कि शासकीय अधिकारों के कथित दुरुपयोग की गंभीर जांच का विषय बन सकता है।

एक वर्षीय संविदा नियुक्ति, लेकिन जिला स्तर की महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां?

इसी बीच आरोप है कि शहरी मोहल्ला क्लिनिक में एक वर्ष की संविदा नियुक्ति पर कार्यरत डॉ. प्रमोद तिवारी और डॉ. सेमुवल को क्रमशः एनसीडी जिला नोडल अधिकारी और जिला टीकाकरण अधिकारी जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी गईं।

सवाल यह उठ रहा है कि संविदा नियुक्ति की मूल शर्तों और पद की प्रकृति के अनुरूप इन चिकित्सकों को जिला स्तरीय नोडल दायित्व सौंपने के लिए कौन-सा सक्षम आदेश जारी किया गया और इसके लिए शासन के कौन-से नियम लागू किए गए?

डॉ. सौरभ शर्मा की पदस्थापना पर भी सवाल

आरोपों का एक और गंभीर पहलू डॉ. सौरभ शर्मा से जुड़ा है। बताया गया है कि वे चिरायु योजना के तहत संविदा आधार पर बिल्हा में पदस्थ थे, लेकिन उन्हें कथित तौर पर बिना स्पष्ट आदेश के जिला कार्यालय में कार्य कराया जा रहा है।

आरोप है कि जिला कार्यालय में उनके लिए उपस्थिति पंजी और पे-डाटा से संबंधित व्यवस्था स्पष्ट नहीं होने के बावजूद वेतन भुगतान किया जा रहा है तथा वार्षिक कार्यमूल्यांकन के आधार पर सेवा वृद्धि भी दी जा रही है।

इसके अलावा उन्हें जिला नोडल अधिकारी RBSSK, प्रभारी अधिकारी हाट बाजार योजना, एम्बुलेंस सेवाएं, सह-प्रभारी प्रोटोकॉल, नर्सिंग होम एक्ट समिति के सदस्य तथा CM पोर्टल 1076 के नोडल अधिकारी जैसे विभिन्न दायित्व दिए जाने का दावा किया गया है।

जिला स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे बड़े सवाल

यदि इन आरोपों में तथ्यात्मक आधार है, तो सबसे बड़ा सवाल यही है कि संविदा चिकित्सकों को उनकी नियुक्ति शर्तों से परे जाकर जिला स्तर के प्रशासनिक एवं नोडल दायित्व किस अधिकार के तहत सौंपे गए?

वहीं, जिला स्तर पर CMHO, DHO, DPM और विभिन्न योजनाओं के प्रभारी/नोडल अधिकारियों की कार्यप्रणाली को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। आरोप लगाने वालों का कहना है कि जब अधिकारियों के पद और अधिकार क्षेत्र को लेकर ही स्पष्टता नहीं होगी, तो ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में संचालित स्वास्थ्य योजनाओं की वास्तविक गुणवत्ता और निगरानी कैसे सुनिश्चित होगी?

‘कागजों में चल रहा स्वास्थ्य विभाग’—जांच की मांग

स्वास्थ्य विभाग में सामने आ रहे इन आरोपों ने विभागीय पारदर्शिता, जवाबदेही और प्रशासनिक अनुशासन पर बहस छेड़ दी है। आरोप लगाने वालों का कहना है कि जिले में स्वास्थ्य योजनाओं का बड़ा हिस्सा कागजी कार्रवाई तक सीमित होने की स्थिति में पहुंच गया है और इसके लिए अधिकारियों द्वारा लिए जा रहे निर्णयों तथा कार्यप्रणाली की स्वतंत्र जांच आवश्यक है।

अब सवाल यह है कि BMO की सील-मुहर और हस्ताक्षर का इस्तेमाल किसके अधिकार से हुआ? 15–20 आदेशों की वैधता क्या है? संविदा चिकित्सकों को जिला स्तरीय नोडल जिम्मेदारियां देने के पीछे कौन-से शासकीय आदेश हैं? और जिला कार्यालय में पदस्थापना, उपस्थिति एवं वेतन भुगतान की प्रक्रिया किस नियम के तहत हुई?

इन सभी बिंदुओं की दस्तावेजों के आधार पर निष्पक्ष विभागीय जांच होने पर ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

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