*खा गए मरीजों का हक और डकार भी नहीं मारे*
BMO BPM की जोड़ी ने किया कमाल
Rs - 8862508=00 हलक में डाल
मरीजों के इलाज के लिए आई ₹88.62 लाख की राशि पर सवाल, बिल्हा स्वास्थ्य केंद्र में वित्तीय अनियमितता के आरोप
जीवनदीप समिति से लेकर विभिन्न सरकारी मदों तक खर्च का हिसाब मांगा; BMO और BPM की भूमिका की निष्पक्ष जांच की मांग
बिल्हा, बिलासपुर। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बिल्हा में मरीजों को बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने और आवश्यक संसाधनों की व्यवस्था के लिए विभिन्न मदों से प्राप्त राशि के उपयोग को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। शिकायतकर्ता के अनुसार, तत्कालीन खंड चिकित्सा अधिकारी (BMO) और ब्लॉक प्रोग्राम मैनेजर (BPM) की कार्यप्रणाली के संबंध में उपलब्ध सूचना के अधिकार (RTI) से प्राप्त दस्तावेजों के आधार पर कुल ₹88,62,508 की राशि के व्यय में कथित वित्तीय अनियमितताओं की जांच की मांग की गई है।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि मरीजों के हित में उपलब्ध कराई गई राशि के खर्च, खरीदी गई सामग्री के स्टॉक में दर्ज होने, वितरण तथा बिल-वाउचरों की वैधता की निष्पक्ष जांच आवश्यक है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और जिम्मेदारी निर्धारित करने के लिए सक्षम एजेंसी की जांच जरूरी है।
विभिन्न मदों में खर्च की राशि पर उठे सवाल
शिकायतकर्ता द्वारा उपलब्ध कराए गए विवरण के अनुसार, विभिन्न मदों में निम्नलिखित राशि का उल्लेख किया गया है—
1. जीवनदीप समिति, CHC बिल्हा: एसी मरम्मत, कंप्यूटर मरम्मत, स्टेशनरी, दो एसी की खरीदी एवं श्रमिकों के पारिश्रमिक भुगतान के नाम पर ₹36,55,401।
2. मुख्यमंत्री राहत कोष से CHC बिल्हा को राशि: ₹13,00,000।
3. मुख्यमंत्री राहत कोष से PHC बेलतरा को राशि: ₹7,00,000।
4. जनपद पंचायत बिल्हा से प्राप्त राशि: ₹7,00,000।
5. SDM बिल्हा द्वारा प्रदाय राशि: ₹6,00,000।
6. मुख्य कार्यपालन अधिकारी, बोदरी द्वारा प्रदाय राशि: ₹7,00,000।
7. अन्य मदों में व्यय: ₹12,07,107।
कुल कथित व्यय: ₹88,62,508।
बिल-वाउचर, स्टॉक एंट्री और सामग्री वितरण की जांच जरूरी
शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि संबंधित खर्चों में बिल-वाउचरों की वैधता, भुगतान की प्रमाणिकता, खरीदी गई सामग्री की स्टॉक रजिस्टर में प्रविष्टि तथा सामग्री के वास्तविक वितरण की स्थिति स्पष्ट होना जरूरी है। शिकायत में यह भी सवाल उठाया गया है कि क्या संबंधित खरीदी और भुगतान निर्धारित वित्तीय नियमों के अनुसार किए गए थे।
शिकायतकर्ता के अनुसार, यदि अभिलेखों में केवल भुगतान संबंधी मुहर या हस्ताक्षर उपलब्ध हैं, तो इससे अपने आप खरीदी, सामग्री प्राप्ति और वितरण की पुष्टि नहीं होती। इसलिए संबंधित मूल बिल, कैशबुक, बैंक भुगतान विवरण, स्टॉक रजिस्टर, क्रय प्रक्रिया और वितरण अभिलेखों का मिलान कराया जाना चाहिए।
तत्कालीन BMO और BPM की भूमिका जांच के दायरे में लाने की मांग
शिकायतकर्ता का कहना है कि संबंधित अवधि में तत्कालीन BMO और BPM की भूमिका की जांच होनी चाहिए। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि बाद में विभागीय स्तर पर की गई कार्रवाई या जांच में खर्चों को सही बताए जाने के संबंध में उपलब्ध अभिलेखों की स्वतंत्र समीक्षा जरूरी है।
यदि किसी अधिकारी द्वारा जांच में नियमों की अनदेखी की गई हो अथवा बिना पर्याप्त दस्तावेजों के व्यय को सही प्रमाणित किया गया हो, तो उसकी भी जिम्मेदारी निर्धारित की जानी चाहिए। इन आरोपों पर संबंधित अधिकारियों का पक्ष और विभागीय जांच के निष्कर्ष सामने आना अभी आवश्यक है।
समयबद्ध जांच नहीं हुई तो EOW/ACB में शिकायत की चेतावनी
शिकायतकर्ता ने मांग की है कि ₹88,62,508 के कथित व्यय की मदवार जांच कराई जाए। इसमें मूल बिल-वाउचर, जीएसटी संबंधी दस्तावेज जहां लागू हों, भुगतान रिकॉर्ड, स्टॉक एंट्री, सामग्री वितरण, बैंक विवरण और संबंधित अधिकारियों की भूमिका की जांच शामिल हो।
शिकायतकर्ता ने चेतावनी दी है कि यदि निर्धारित समय में निष्पक्ष एवं विधिवत जांच नहीं की गई, तो सूचना के अधिकार से प्राप्त दस्तावेजों और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों के साथ आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) तथा भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) के समक्ष शिकायत प्रस्तुत कर जांच का अनुरोध किया जाएगा।
अब प्रमुख सवाल यह है कि मरीजों के उपचार और स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए उपलब्ध कराई गई राशि का वास्तविक उपयोग कहां और किस प्रकार हुआ? इसका स्पष्ट जवाब संबंधित वित्तीय अभिलेखों की जांच और सक्षम एजेंसी की निष्पक्ष कार्रवाई से ही सामने आ सकेगा।

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