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के वी के में अक्ति तिहार एवं उर्वरकों की वैकल्पिक व्यवस्था पर कृषक प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित





केवीके में अक्ति तिहार एवं उर्वरकों की वैकल्पिक व्यवस्था पर कृषक प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित


बिलासपुर। कृषि विज्ञान केंद्र, बिलासपुर में पारंपरिक लोकपर्व अक्ति तिहार के साथ-साथ उर्वरकों की वैकल्पिक व्यवस्था पर कृषक प्रशिक्षण कार्यक्रम का उत्साह, श्रद्धा एवं हर्षोल्लास के साथ आयोजन किया गया। कार्यक्रम में कृषि परंपराओं, ग्रामीण संस्कृति एवं किसानों की समृद्धि तथा टिकाऊ कृषि प्रणाली से जुड़े विविध आयोजन संपन्न हुए।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि भारतीय किसान संघ के प्रदेश अध्यक्ष, 

माधव सिंह रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता कृषि कालेज के डीन डॉ. एनके. चौरे, अधिष्ठाता द्वारा की गई। विशिष्ट अतिथि के रूप में क्षेत्रीय कृषि अनुसंधान केंद्र के मुख्य वैज्ञानिक 

डॉ. संजय वर्मा,

 बिलासपुर उपस्थित रहे।

मुख्य अतिथि माधव सिंह ने कहा पारंपरिक खेती एवं गौ आधारित खेती के महत्व पर प्रकाश डालते हुए किसानों को प्राकृतिक एवं टिकाऊ कृषि पद्धतियों को अपनाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि भारतीय कृषि परंपराएं प्रकृति के अनुकूल हैं तथा गौ आधारित खेती से भूमि की उर्वरता, उत्पादन गुणवत्ता एवं पर्यावरण संरक्षण में सहायता मिलती है।कालेज के डीन डॉ. एनके चौरे ने अक्ति तिहार की शुभकामनाएं देते हुए किसानों को जैविक खेती अपनाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि जैविक खेती से भूमि की उर्वरता बनी रहती है, उत्पादन लागत में कमी आती है तथा स्वास्थ्यवर्धक खाद्यान्न प्राप्त होता है।

विशिष्ट अतिथि डॉ. संजय वर्मा ने कृषकों को गुणवत्तापूर्ण बीजों का चयन करते हुए उनके उपयोग के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि उन्नत एवं प्रमाणित बीजों के उपयोग से बेहतर अंकुरण, अधिक उत्पादन तथा रोग प्रतिरोधक क्षमता प्राप्त होती है।

इस अवसर पर कृषि विज्ञान केंद्र के

वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख,डॉ गीत शर्मा

 ने अतिथियों का स्वागत करते हुए अक्ति तिहार के सांस्कृतिक एवं कृषि महत्व पर प्रकाश डाला। साथ ही उन्होंने हरी खाद की उत्पादन तकनीक एवं उसकी उपयोगिता के संबंध में विस्तारपूर्वक जानकारी दी। उन्होंने बताया कि हरी खाद के उपयोग से भूमि की उर्वरता बढ़ती है, जैविक पदार्थों की मात्रा में वृद्धि होती है तथा फसलों की उत्पादकता में सुधार होता है।

वरिष्ठ वैज्ञानिक (मृदा विज्ञान डॉ. पीके. केशरी ने जैव उर्वरकों की महत्ता एवं उपयोगिता के बारे में जानकारी देते हुए विशेष रूप से नीलहरित शैवाल की उत्पादन तकनीक पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि जैव उर्वरकों के प्रयोग से मृदा स्वास्थ्य में सुधार होता है तथा रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम की जा सकती है।


सस्य विज्ञान विशेषज्ञ

डॉ. शिल्पा कौशिक मोदी ने कार्यक्रम का सफल संचालन किया तथा किसानों को प्राकृतिक खेती के बारे में विस्तारपूर्वक जानकारी दी। उन्होंने प्राकृतिक खेती के माध्यम से कम लागत, स्वस्थ उत्पादन एवं मृदा संरक्षण के लाभों पर प्रकाश डाला।

पौध रोग विशेषज्ञ

 जयंत साहू ने किसानों को मृदा जनित रोगों के प्रबंधन एवं कीटव्याधियों के समुचित नियंत्रण के बारे में विस्तारपूर्वक जानकारी दी। उन्होंने बताया कि समय पर पहचान, संतुलित पोषण, जैविक उपायों एवं समेकित प्रबंधन तकनीकों के माध्यम से फसलों को सुरक्षित रखा जा सकता है।

वरिष्ठ वैज्ञानिक

डॉ. दिनेश पांडे

ने कृषकों को धान एवं गेहूं की उन्नत किस्मों के चयन के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी दी। उन्होंने बताया कि क्षेत्रानुसार उपयुक्त किस्मों के चयन से उत्पादन एवं गुणवत्ता दोनों में वृद्धि की जा सकती है।

अंत में गृह विज्ञान विशेषज्ञ डॉ. निवेदिता पाठक, ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया तथा उपस्थित कृषकों को लू से बचाव के उपायों की महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान की। उन्होंने गर्मी के मौसम में पर्याप्त जल सेवन, छायादार स्थान पर विश्राम तथा आवश्यक सावधानियां अपनाने की सलाह दी।

कार्यक्रम में डॉ. चंचला रानी पटेल, प्रक्षेत्र प्रबंधक तथा सुशीला ओहदार, कार्यक्रम सहायक विशेष रूप से उपस्थित रहे।

कार्यक्रम में जिले के प्रगतिशील कृषक, ग्रामीण युवा एवं केंद्र के समस्त अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे। अंत में सभी के सुख-समृद्धि एवं उत्तम कृषि उत्पादन की कामना के साथ कार्यक्रम का समापन किया गया।


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